गणगौर व्रत
31 मार्च, सोमवार
को मनाया जाएगा। यह पर्व सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
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By Deepika Patidar
क्यों मनाते हैं गणगौर व्रत?
यह व्रत सौभाग्य, सुख-समृद्धि और अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
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गणगौर पूजन कैसे करें?
1. स्नान कर संकल्प लें। 2. माँ गौरी और ईसर जी की मिट्टी की मूर्ति बनाएं। 3. सुहाग सामग्री अर्पित करें। 4. भोग लगाएं और कथा सुनें।
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गणगौर के पारंपरिक गीत और नृत्य
– राजस्थानी लोक गीत गाए जाते हैं। – महिलाएं समूह में घूमर नृत्य करती हैं।
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गणगौर किन राज्यों में प्रसिद्ध है?
राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात में यह त्योहार विशेष रूप से धूमधाम से मनाया जाता है।
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गणगौर का अंतिम दिन – विसर्जन
– 16 दिनों के उत्सव के बाद गौरी की मूर्ति को जल में विसर्जित किया जाता है। – महिलाएं गीत गाते हुए गौरी को विदा करती हैं।
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गणगौर की कहानी
माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था, जिससे यह व्रत शुरू हुआ।
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माँ गौरी और भगवान शिव की कृपा से आपके जीवन में सुख-समृद्धि आए।
गणगौर व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं!
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