Kab rakha jyega dashamata ka vrat 2025
By Deepika Patidar
परिवार की समृद्धि, सुख और शांति के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है।
परिवार की समृद्धि, सुख और शांति के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है।
इस वर्ष दशामाता व्रत 24 मार्च 2025, सोमवार को मनाया जाएगा। दशमी तिथि 24 मार्च को प्रातः 5:39 बजे से 25 मार्च को प्रातः 5:05 बजे तक रहेगी।
दशामाता व्रत 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
दशामाता व्रत 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि और घर की दशा सुधारने के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इससे सभी परेशानियाँ दूर होती हैं।
दशामाता व्रत का महत्व
दशामाता व्रत का महत्व
महिलाएँ कच्चे सूत का 10 तार का डोरा बनाकर उसमें 10 गांठ लगाती हैं, उसे हल्दी से रंगती हैं, और पीपल वृक्ष की पूजा करती हैं।
दशामाता व्रत की पूजा विधि
पीपल वृक्ष को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है, और इसकी पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
पीपल वृक्ष की पूजा का महत्व
पूजा के बाद महिलाएँ नल-दमयंती की कथा सुनती हैं, जो इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नल-दमयंती कथा का श्रवण
कथा सुनने के बाद महिलाएँ डोरा गले में बांधती हैं, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
गले में डोरा धारण करना
महिलाएँ घर के द्वार पर हल्दी-कुमकुम के छापे लगाती हैं, जो शुभता का प्रतीक है।
घर के द्वार पर हल्दी-कुमकुम के छापे
यह व्रत करने से घर की दशा सुधरती है, धन संबंधी समस्याएँ दूर होती हैं, और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
दशामाता व्रत के लाभ
यह व्रत हमारी परंपरा और आस्था का प्रतीक है, जो हमें परिवार की भलाई के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।
दशामाता व्रत: परंपरा और आस्था
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